बांग्लादेश में हिंदू अत्याचार पर भड़के Manoj Joshi 

बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते हमलों और वैश्विक चुप्पी पर अभिनेता Manoj Joshi ने कड़ा विरोध जताया।

Manoj Joshi expresses outrage over atrocities

Manoj Joshi : बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना

क्या हम केवल तभी रोते हैं जब कैमरा सही दिशा में घूमता है?

कल्पना कीजिए कि आपके पड़ोस में किसी का घर जल रहा है, लेकिन आप हज़ारों मील दूर लगी आग पर चर्चा करने में व्यस्त हैं। बांग्लादेश में Dipu Chandra Das की क्रूर लिंचिंग के बाद की स्थिति कुछ ऐसी ही है। जब किसी इंसान को भीड़ द्वारा सरेआम मार दिया जाता है, तो सवाल केवल कानून व्यवस्था पर नहीं, बल्कि हमारी वैश्विक अंतरात्मा पर भी उठता है।

हाल ही में वरिष्ठ अभिनेता Manoj Joshi ने इसी मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने एक कड़वा सच दुनिया के सामने रखा। Manoj Joshi का कहना था कि जब गज़ा या फिलिस्तीन में कुछ होता है, तो पूरी दुनिया एकजुट हो जाती है। लेकिन जब बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया जाता है, तो वही दुनिया मौन धारण कर लेती है। यह चयनात्मक संवेदना न केवल दुखद है, बल्कि खतरनाक भी है।

Manoj Joshi के अलावा Janhvi Kapoor और Raveena Tandon जैसी हस्तियों ने भी अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने साफ कहा कि सांप्रदायिक भेदभाव और कट्टरता चाहे किसी भी रूप में हो, उसकी निंदा होनी ही चाहिए। हम अक्सर उन ‘अदृश्य लकीरों’ के शिकार हो जाते हैं जो धर्म और सीमाओं के नाम पर खींची गई हैं। असल में, आम इंसान सिर्फ एक प्यादा बनकर रह जाता है, जबकि असली नुकसान मानवता का होता है।

गहरा विश्लेषण: क्यों चुप है दुनिया?

अक्सर हम सोचते हैं कि जो हमारे करीब नहीं है, वह हमें प्रभावित नहीं करता। लेकिन हिंसा का कोई भूगोल नहीं होता। अगर आज एक जगह कट्टरता को फलने-फूलने दिया गया, तो कल वह आपके दरवाजे तक भी पहुँचेगी।

हस्तियों ने सही कहा है कि हमें खुद को ज्ञान से लैस करना होगा। ज्ञान का मतलब यहाँ केवल किताबें पढ़ना नहीं, बल्कि उस सांप्रदायिक क्रॉसफायर को समझना है जिसमें मासूमों की बलि चढ़ाई जा रही है।

कुछ अलग सोचें: जहाँ हम गलती करते हैं

अक्सर लोग सोचते हैं कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाल देना ही काफी है। लेकिन यहाँ कुछ बातें हैं जो हम अक्सर गलत समझ लेते हैं:

  • तटस्थता का भ्रम: कई लोग सोचते हैं कि विवाद से दूर रहना ही समझदारी है। लेकिन याद रखिए, अन्याय के समय चुप रहना अपराधी का साथ देने के बराबर है।
  • सिर्फ ‘उनका’ मुद्दा: यह केवल हिंदुओं या अल्पसंख्यकों का मुद्दा नहीं है; यह मानवाधिकारों का मुद्दा है।
  • भावना बनाम तथ्य: हम अक्सर भावनाओं में बहकर गलत खबरें फैलाते हैं। बिना सोचे-समझे दी गई प्रतिक्रिया अक्सर स्थिति को और बिगाड़ देती है।

Key Takeaways:

  • समान करुणा: दुनिया को हर पीड़ित के लिए एक जैसी संवेदना दिखानी चाहिए, चाहे उसका धर्म कुछ भी हो।
  • कट्टरता का विरोध: अतिवाद चाहे पीड़ित की तरफ से हो या अपराधी की तरफ से, वह हमेशा निंदनीय है।
  • जागरूकता: सच जानने के लिए खुद को तैयार करें ताकि आप निर्दोषों के लिए खड़े हो सकें।

Munawar Faruqui और अन्य हस्तियों का इस भयावह हत्या के खिलाफ बोलना यह दर्शाता है कि अब समय आ गया है जब हमें अपनी मानवता को धर्म की सीमाओं से ऊपर रखना होगा।

जैसा कि Manoj Joshi ने कहा, “समय अपना जवाब खुद देगा”, लेकिन सवाल यह है कि उस समय हम कहाँ खड़े होंगे?

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