Kapoor खानदान का काला सच: Karisma kapoor ने फिल्मों के लिए झेले रिजेक्शन

kapoor खानदान की बेटियों का फिल्मों में आना मना था, जानिए karisma kapoor का संघर्षपूर्ण सफर।

Karisma Kapoor faced rejection for film roles.

Karisma Kapoor की जंग

क्या आपने कभी सोचा है कि जिस खानदान को बॉलीवुड का ‘प्रथम परिवार’ कहा जाता है, वहां की बेटियों को स्क्रीन तक पहुँचने के लिए घर के अंदर ही जंग लड़नी पड़ी होगी?

Kareena Kapoor का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अपनी बड़ी बहन Karisma Kapoor के उन आंसुओं और संघर्षों का जिक्र किया है, जो चकाचौंध के पीछे छिपे रह गए।

परंपरा की बेड़ियाँ और एक माँ की हिम्मत

उस दौर में कपूर परिवार की महिलाओं का फिल्मों में आना मना था। जब Karisma ने एक्ट्रेस बनने की इच्छा जताई, तो समाज और परिवार के कुछ लोग इसके खिलाफ थे।

लेकिन उनकी माँ, Babita, चट्टान की तरह खड़ी रहीं। उन्होंने Randhir Kapoor को फोन कर साफ कह दिया कि उनकी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है।

शुरुआत में Randhir Kapoor हैरान थे, लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी—अगर इस रास्ते पर चलना है, तो पूरी शिद्दत और लगन के साथ।

रिजेक्शन और पिता का दूर रहना

ज्यादातर लोग मानते हैं कि स्टार किड्स के लिए रास्ता आसान होता है। लेकिन Kareena ने खुलासा किया कि Karisma ने अनगिनत स्क्रीन टेस्ट दिए और कई बार रिजेक्ट भी हुईं।

हैरानी की बात यह है कि शुरुआती दिनों में उनके पिता ने भी उनका साथ नहीं दिया। उन्हें खुद को साबित करने के लिए अकेले लड़ना पड़ा।

  • Karisma कपूर परिवार की पहली बेटी बनीं जिन्होंने स्क्रीन पर कदम रखा।
  • उन्होंने साबित किया कि टैलेंट किसी जेंडर या पुरानी परंपरा का मोहताज नहीं होता।
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जब पिता का गर्व आंसुओं में बदला

Randhir Kapoor ने जब पहली बार अपनी बेटी को बड़े पर्दे पर चमकते देखा, तो उनका सारा विरोध गर्व में बदल गया।

वह इतने भावुक हो गए कि Karisma को गले लगाकर बोले, “तुम मेरी बेटी नहीं, मेरा बेटा हो।” यह उस समय की पितृसत्तात्मक सोच पर एक बेटी की जीत थी।

Kareena ने अपनी बहन को ‘एटर्नल डिवा’ कहा क्योंकि उन्होंने ही कपूर खानदान की आने वाली बेटियों (जैसे करीना खुद) के लिए रास्ता साफ किया।

Counter-Intuitive Advice: जो हम अक्सर गलत समझते हैं

अक्सर लोग कहते हैं कि Karisma और Kareena को ‘कपूर’ सरनेम का फायदा मिला। लेकिन सच्चाई यह है कि उन्हें विरासत में मिली पाबंदियों से लड़ना पड़ा।

उन्होंने कपूर खानदान के गिरते हुए फिल्मी करियर को अपने कंधों पर तब संभाला जब परिवार के पुरुष सदस्य उस दौर में उतने सफल नहीं हो पा रहे थे। उनकी सफलता केवल ‘लक’ नहीं, बल्कि बरसों की मेहनत का नतीजा है।

दो बहनों की अटूट बॉन्डिंग

आज ये दोनों बहनें बॉलीवुड की सबसे प्रभावशाली महिलाएं हैं। फैंस का मानना है कि इन दोनों ने कपूर खानदान की साख को न सिर्फ बचाया, बल्कि उसे नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। वह संघर्ष ही था जिसने आज इन्हें ‘एवरग्रीन डिवा’ बना दिया है।

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