John Abraham की फिल्म Oslo: ए टेल ऑफ प्रॉमिस का टीज़र रिलीज़ हो गया है और IFFI में इसकी तारीफ़ हुई है।

🐾 सिर्फ़ एक फ़िल्म नहीं, ‘ओस्लो’ एक इमोशन है 🥺
क्या आपने कभी सोचा है कि कोई जानवर किसी इंसान को इंसानियत सिखा सकता है? जॉन अब्राहम, जो अपनी एक्शन फ़िल्मों के लिए जाने जाते हैं, अपनी मसल्स नहीं, बल्कि अपना दिल लाते हैं।
इसलिए ओस्लो: ए टेल ऑफ़ प्रॉमिस कोई आम फ़िल्म नहीं है:
🎬 हीरो नंबर 1: ओस्लो
इस कहानी का असली हीरो कोई बॉलीवुड स्टार नहीं, बल्कि ओस्लो नाम का एक साइबेरियन हस्की है। यह फ़िल्म पूजा भाले के साथ उसकी दोस्ती की सच्ची कहानी है। पूजा बताती है कि ओस्लो उसकी ज़िंदगी में एक डरे हुए कुत्ते के रूप में आया था, लेकिन उसने उसे बिना डरे प्यार करना सिखाया। सोचिए, एक बेज़ुबान जानवर किसी का ‘गुरु’ बन जाए!
❤️ जॉन का ड्रीम प्रोजेक्ट
हम सब जानते हैं कि जॉन अब्राहम जानवरों से कितना प्यार करते हैं। उन्होंने इस फिल्म में सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि अपना दिल भी लगाया है। जॉन कहते हैं, “यह टीज़र तो बस एक झलक है; पूरी फिल्म आपको दूसरों (जानवरों) की नज़र से ज़िंदगी देखना सिखाएगी।”
😭 गोवा में लोग क्यों रोए?
जब यह फिल्म हाल ही में IFFI (गोवा) में दिखाई गई, तो थिएटर में शायद ही कोई ऐसा था जिसकी आँखें नम न हुई हों।
यह फिल्म सिर्फ स्क्रीन पर नहीं चलती; यह सीधे दिल को छूती है। यह दिखाती है कि इंसान और जानवर एक-दूसरे के ज़ख्म कैसे भर सकते हैं।
🌍 आज की सबसे बड़ी ज़रूरत
आजकल, हम कंक्रीट के जंगलों में खोए हुए हैं। यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि हमें अपने आस-पास के बेज़ुबान साथियों के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए। यह उम्मीद और हिम्मत की कहानी है।

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