फिल्म Matru में Imran Khan के चयन की कड़वी सच्चाई 

अभिनेता Imran Khan ने Vishal Bhardwaj द्वारा किए गए ‘बेईमान’ कास्टिंग के अनुभव को साझा किया।

Imran Khan's casting in the film Matru

Imran Khan की फिल्म Matru

क्या आपने कभी किसी ऐसी जगह काम किया है जहाँ आपको महसूस हो कि आप वहाँ फिट नहीं बैठते? कल्पना कीजिए, एक बड़ा निर्देशक आपको अपनी फिल्म के लिए बुलाता है, लेकिन सेट पर पहले ही दिन से आपको लगता है कि वह आप पर भरोसा ही नहीं करता।

अभिनेता Imran Khan ने हाल ही में साल 2013 की फिल्म ‘Matru Ki Bijlee Ka Mandola’ को लेकर कुछ ऐसी ही बातें कहीं, जिसने फिल्म जगत में चर्चा छेड़ दी है।

उन्होंने साफ़ कहा कि विशाल भारद्वाज (Vishal Bhardwaj) ने उन्हें किसी रचनात्मक कारण से नहीं, बल्कि ‘बेईमान’ वजहों से फिल्म में लिया था।

बजट की मजबूरी और गलत चुनाव 

Imran khan के अनुसार, इस रोल के लिए पहली पसंद अजय देवगन (Ajay Devgn) थे। लेकिन जब उन्होंने फिल्म छोड़ी, तब विशाल को एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो फिल्म के लिए बड़ा बजट दिलवा सके। ‘

उस समय ‘Delhi Belly’ और ‘Mere Brother Ki Dulhan’ जैसी हिट फिल्में देने के बाद इमरान का नाम बाजार में बड़ा था। 

विशाल को फिल्म बनाने के लिए पैसे चाहिए थे और इमरान के जुड़ने से वह बजट मिलना आसान हो गया। समस्या यह थी कि विशाल के मन में इमरान एक हरियाणवी ग्रामीण के किरदार के लिए कभी फिट बैठे ही नहीं।

गहरा विश्लेषण: जब भरोसा टूट जाता है 

फिल्म निर्माण केवल कैमरे और लाइट का खेल नहीं है, यह भरोसे का रिश्ता है। इमरान ने बताया कि शूटिंग के पहले दिन से ही उन्हें निर्देशक की बेरुखी महसूस होने लगी थी। विशाल उनसे ‘Action’ और ‘Cut’ के अलावा कोई बात नहीं करते थे।

जब एक निर्देशक अपने ही चुने हुए कलाकार पर विश्वास नहीं करता, तो अभिनेता सेट पर सबसे ज्यादा अकेला महसूस करता है। यह फिल्म इमरान के जीवन की सबसे एकाकी यात्रा बन गई, जहाँ उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया था।

विपरीत सलाह: मौन हमेशा अच्छा नहीं होता 

अक्सर पेशेवर दुनिया में कहा जाता है कि कम बोलना और सिर्फ अपने काम पर ध्यान देना सफलता की कुंजी है। लेकिन अभिनय की दुनिया में यह सलाह अक्सर गलत साबित होती है।

अगर आपका निर्देशक आपको कोई सुझाव नहीं दे रहा है या आपकी कमियों पर चर्चा नहीं कर रहा है, तो समझ लीजिए कि वह आपसे उम्मीद छोड़ चुका है। 

सृजनात्मक कार्यों में टोकना और बहस करना यह दर्शाता है कि सामने वाला आप में दिलचस्पी ले रहा है। विशाल की चुप्पी इमरान के लिए मार्गदर्शन नहीं, बल्कि एक सजा बन गई थी।

इमरान की शालीनता और स्पष्टीकरण 

जब यह मामला सोशल मीडिया पर बढ़ा, तो इमरान ने स्थिति को संभाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अभी भी विशाल भारद्वाज की इज्जत करते हैं और उन्हें एक बेहतरीन फिल्ममेकर मानते हैं।

उनका मकसद किसी पर कीचड़ उछालना नहीं, बल्कि यह दिखाना था कि इंडस्ट्री में फिल्में कैसे बनती हैं और कलाकार कैसे चुने जाते हैं।

जब एक प्रशंसक ने उन्हें “अभिनेता न होने” का ताना दिया, तो इमरान ने बड़ी विनम्रता से कहा, “शुक्रिया भाई, मैं अब भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हूँ।”

मुख्य बातें:

  • फिल्म चयन अक्सर कला के बजाय बजट और बाजार की मांग पर आधारित होता है।
  • निर्देशक और अभिनेता के बीच का तालमेल फिल्म की आत्मा होता है।
  • Imran Khan ने उद्योग के कड़वे सच को बिना किसी द्वेष के साझा किया।
  • अभिनेता ने अपनी आलोचना को भी बहुत सकारात्मक तरीके से स्वीकार किया।

सिनेमा की दुनिया बाहर से जितनी रंगीन दिखती है, उसके भीतर समझौतों की उतनी ही गहरी परतें होती हैं। इमरान खान की यह ईमानदारी हमें उस हकीकत से रूबरू कराती है जहाँ एक कलाकार कभी-कभी केवल एक आर्थिक मोहरा बनकर रह जाता है।

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