Sunny Deol ने Ikkis स्क्रीनिंग पर पिता धर्मेंद्र को याद किया; 1 जनवरी को रिलीज होगी।

Ikkis स्क्रीनिंग
क्या सिनेमा केवल मनोरंजन का जरिया है, या यह उन यादों को सहेजने का एक झरोखा है जो वक्त के साथ धुंधली पड़ जाती हैं? कल रात मुंबई में आयोजित Ikkis की स्पेशल स्क्रीनिंग को देखकर ऐसा ही महसूस हुआ।
वहाँ चमक-धमक तो थी, लेकिन उससे कहीं ज्यादा गहरा एक भावनात्मक जुड़ाव था, जो परदे पर दिखने वाली कहानी और उसे देखने आए लोगों के बीच साफ नजर आ रहा था।
आँखों की नमी और पिता का साया
जब Sunny Deol अपने पिता Dharmendra के बड़े से पोस्टर के सामने रुके, तो वक्त जैसे थम गया। कैमरों की फ्लैश चमक रही थी, लेकिन उनकी निगाहें सिर्फ उस पोस्टर पर टिकी थीं।
यह सिर्फ एक अभिनेता का दूसरे अभिनेता को सम्मान नहीं था; यह एक बेटे की अपने पिता के प्रति वह खामोश मोहब्बत थी, जो शब्दों से ज्यादा आँखों की नमी में बयान हो रही थी।
Sunny Deol मुस्कुराए जरूर, लेकिन उनकी आँखों के कोनों में छिपे आंसू इस बात का सबूत थे कि यह फिल्म उनके परिवार के लिए कितनी खास है।
सितारों भरी शाम और भाईचारा
बॉलीवुड में रिश्तों की कड़वाहट की खबरें तो अक्सर आती हैं, लेकिन Salman Khan और Sunny Deol के बीच की केमिस्ट्री ने एक अलग ही कहानी बयां की।
दोनों को काफी देर तक गहरी और खुशनुमा बातचीत करते देखा गया। इसके साथ ही देओल परिवार का पूरा कुनबा— Bobby Deol, अपनी पत्नी Tanya Deol और बेटे Aryaman Deol के साथ—वहाँ मौजूद था।
Abhay Deol की मौजूदगी ने इस पारिवारिक पुनर्मिलन को और भी मुकम्मल बना दिया। Tabu, Manish Malhotra और Riteish Deshmukh जैसे सितारों ने भी अपनी उपस्थिति से इस शाम की रौनक बढ़ाई।
एक युद्ध, जो दिल से लड़ा गया
Sriram Raghavan द्वारा निर्देशित यह फिल्म Second Lieutenant Arun Khetarpal के अदम्य साहस की कहानी है।
फिल्म का नाम Ikkis इसलिए रखा गया क्योंकि अरुण ने मात्र 21 साल की उम्र में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध (बैटल ऑफ बसंतर) के दौरान शहादत प्राप्त की थी। Agastya Nanda ने इस वीर योद्धा का किरदार निभाया है।
लेकिन इस फिल्म का सबसे मर्मस्पर्शी हिस्सा Dharmendra की मौजूदगी है। वह मरणोपरांत इस फिल्म में अरुण के पिता, Brigadier ML Khetarpal के रूप में नजर आएंगे।
यह देखना वाकई दिलचस्प और भावुक होगा कि कैसे एक वास्तविक जीवन का पिता-पुत्र का समीकरण परदे पर एक सैनिक और उसके पिता के रूप में उभरता है।
अक्सर लोग क्या गलत समझते हैं?
अक्सर दर्शकों को लगता है कि युद्ध पर आधारित फिल्में केवल बंदूकों के शोर और राष्ट्रवाद के नारों के बारे में होती हैं।
असल में ‘Ikkis’ जैसी फिल्में उस व्यक्तिगत क्षति और बलिदान के बारे में होती हैं जिसे एक परिवार चुपचाप सहता है।
यह फिल्म केवल एक युद्ध जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि एक 21 साल के लड़के के उन सपनों की कहानी है जिन्हें उसने देश के लिए कुर्बान कर दिया।
लोग अक्सर बायोपिक में केवल ‘शारीरिक समानता’ ढूंढते हैं, जबकि Agastya Nanda और Simar Bhatia का असली इम्तिहान उस कालखंड की संवेदनाओं को जीवंत करने में है।
मुख्य बातें:
- फिल्म 1 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।
- यह महान अभिनेता Dharmendra की आखिरी सिनेमाई प्रस्तुति है।
- Agastya Nanda और Jaideep Ahlawat जैसे मंझे हुए कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं।
यह फिल्म केवल इतिहास का पन्ना नहीं, बल्कि भावनाओं का वह दस्तावेज है जो हमें याद दिलाता है कि आजादी की कीमत क्या होती है।
नए साल की शुरुआत में Ikkis का इंतजार हर उस शख्स को रहेगा जो भारतीय इतिहास और सिनेमा से प्रेम करता है।

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